जवाब – Jawaab

खुद से कभी जवाब माँगा है उन सवालों का?
कारण क्या है उलझन भरे इन ख़यालों का?

खुद में ज़रा झाँक कर देखो, शायद जवाब मिल जाए,
जिन ज़ख्मो को छिपाया है, शायद वह भी सिल जाए|

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Translation (By Ridhi Gupta)
Have you tried asking yourself those questions?
what’s the reason behind
all these troubled thoughts you’ve put into motion.
Look inside yourself and the answers you just might find,
It could finally heal, all those wounds you try to hide.

 

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चिंगारी – Chingaari

हुस्न पर सीमित कर दिया मुझे,
मुबारक हो इस साज़िश पर|
काबिलियत को भी नज़रअंदाज़ कर दिया
अब और चिंगारी मत लगाओ मेरी बढ़ती रंजिश पर|

 

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Translation (by Ridhi Gupta)

You limited me to my body,
This conspiracy of yours I applauded.
Went on to neglect my ability,
My growing anguish needs no more sparks to be added.

ज़िन्दगी की बातें – Zindagi ki baatein

किताबें कई पढ़ी तो नहीं मैंने,
पर लोगों से कई मुलाकातें हुई है,
ख़ुशी का हर दिन,
और दुःख की कई रातें हुई हैं,
चुबता हुआ सन्नाटा , टकराती हुई आवाज़ें,
ज़िन्दगी की छोटी – बड़ी , हर पलों की बातें हुई हैं|

 

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Translation (By Ridhi Gupta)

I haven’t read too many books,

But I have met a lot of folks.

Days of happiness,

and nights full of sadness, have passed,

Chaotic voices, and pinching silence,

Life’s, small and big, a lot of stories we’ve discussed.

भय – Bhay

ये जो भय है ना, भय,
कई सपनो को चूर कर देता है|
.
.
ये जो भय है ना, इसे ढाल बना लो,
तो इन्ही सपनो को मशहूर कर देता है|

 

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Translation (by Ridhi Gupta)

That fear, you know That Fear?
It’s turned so many dreams to dust.
That fear, you know That Fear,
If into a shield it is turned,
Those same dreams that were dust,
Like brilliant stars they would then burn.

आवाज़ें – Aawaazein

चेहरों पर मुस्कुराहट लिए चले जा रहे हैं
नजाने कहीं शोर मच रहा था
कहीं गुस्से का तो कहीं सिसकियों का
तो कहीं धोके का खेल रच रहा था

खैर मुस्कान तो सिर्फ एक नकाब है
क्यूंकि ये तो वह आवाज़ें हैं जिनका साया मन के हर कोनो में जच रहा था|

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Translation (by Ridhi Gupta)

With smiles plastered on our faces,
We keep walking through life’s phases,
Surrounded by sounds that portrayed,
The anger, the sadness,
And those of hearts being betrayed.
But we’ve always known those smiles as facades.
Because the voices we heard were those,
whose every intonation is like a hidden shadow,
in the corners of our mind they hide, they grow.

झंकार – Jhankaar

किश्तों में ही तो जी रहे हैं
या ज़रा ज़रा सा मर रहे हैं?
इस दुनिया में सब ही फनकार बने फिर रहे हैं,
बस ख़ुशी की एक झंकार के लिए तरस रहे हैं|

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Translation (By Ridhi Gupta)

Aren’t we all, in bits and pieces, trying to be alive?
But as life passes, little by little, we all slowly die?
Pretending to be artists, aristocrats of the highest order
All we crave for, is that happiness
The chime of our own laughter.

Khwahishein

ख्वाहिशें भी सीमाएं कहाँ समझती हैं ?
हंस कर सवाल करती है , जैसे हम उसे पाने के काबिल ही न हो
गुरूर है तुम में , हम में भी काम नहीं ,
सुकून तोह उन्ही ख्वाहिशों को पाने में है जो आसानी से हासिल न हो|

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Translation (By Ridhi Gupta)

When has a wish,
Ever known it’s bounds,
When has a dream,
Ever not been profound.
But then they turn back,
And laugh, at Me!
They think I’m not capable,
Of attaining them you see.
I accept their pride,
For they have seen men fail,
But they haven’t met me yet,
My Pride is not that frail.
Eternal Peace is something,
I will only ever gain,
When what they say is unattainable,
I have at my feet, Now Lain.

Bayaan

सोचा खामोशी का खेल खेलते हैं,
क्योंकि हड़बड़ी जो जुबां कर देती है
.
.
लेकिन इन शातिर नज़रों का क्या करें?
कमबख्त सब बयां कर देती है|

 ||Translation||
I thought I’d play your heart with my silence,
My words, I stutter and stumble with anyway,
But how to avert these convoluted eyes
They defy me and go forth to declare,
What I was trying so hard, not to say.
.
.
.
.
Translation by – Ridhi Gupta.IMG_20170401_194655_025

Agar Main Zinda Hota

ज़िंदा  रहने  की  कोशिश  या  ज़िन्दगी  जीने  की  साज़िश?
सौभाग्य  है  उनका  जिन्हें  मिली  है  यह  कश्मकश |
सोचा  तो  कभी  नहीं  अपने  ही  देश  में  कोई  अपना  नहीं
डर  में  जीते  हैं  हम, यह  सच  है  कोई  सपना  नहीं |
रोज़  खेलता  था  वह  मेरे  साथ, आज  न  जाने  क्यों  नहीं  आया
माँ  ने  कहा  कहीं  गए  हैं  वो, उनकी  बेरहम  मौत  की  खबर  को  उन्ही के कब्र  में  छुपाया |
अगर  मैं  ज़िंदा  होता  तो  पता  होता  माँ  ने  यह  सच  क्यों  छुपाया |
हम  घर  में  ही  रहते  थे  ज़्यादा तर
माँ  परेशान  रहती  थी  अक्सर |
एक  दिन  कहा  देश  छोड़कर  जाना  है
यहाँ सिर्फ  खोना, कुछ नहीं पाना है |
निकल  पड़े  थे  नयी  शुरुवात  के  लिए
सोचा  न  था  निकले  थे  ज़िन्दगी  के  विश्वासघात  के  लिए |
हमारी एक  कोशिश  थी  ज़िंदा  रहने  की
हिम्मत  तो  जूता  ली  हर  दर्द  सहने  की |
दर्द  सहने  की  ज़रुरत  ही  न  पड़ी
जब  सुई  ही  रुक  गयी  उस  घडी |
अगर  मैं  ज़िंदा  होता  तो  शायद  कहीं  खुश  होता
अगर  मैं  ज़िंदा  होता ,
ज़िंदा  रहने  या  ज़िन्दगी  जीने  के  कश्मकश  में  शायद  मैं  भी  होता , शायद  मैं  भी  होता |
This poetry is a tribute to Aylan Kurdi, his family and every Syrian refugee.