जज़्बातों की बारिशें – jazbaaton ki baarishein

ये आंसू अब गिरते नहीं,
घर बना चुके हैं पलकों के करीब
इस दूरी की आदत पड़ गयी है,
है यह कैसा नसीब?
तू जब होता है, तो आंसू भी बंदिशें तोड़ देते हैं,
तू जब होता है, तो जज़्बातों की बारिशें ओढ़ लेते हैं|

 

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जवाब – Jawaab

खुद से कभी जवाब माँगा है उन सवालों का?
कारण क्या है उलझन भरे इन ख़यालों का?

खुद में ज़रा झाँक कर देखो, शायद जवाब मिल जाए,
जिन ज़ख्मो को छिपाया है, शायद वह भी सिल जाए|

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Translation (By Ridhi Gupta)
Have you tried asking yourself those questions?
what’s the reason behind
all these troubled thoughts you’ve put into motion.
Look inside yourself and the answers you just might find,
It could finally heal, all those wounds you try to hide.

 

ज़िन्दगी की बातें – Zindagi ki baatein

किताबें कई पढ़ी तो नहीं मैंने,
पर लोगों से कई मुलाकातें हुई है,
ख़ुशी का हर दिन,
और दुःख की कई रातें हुई हैं,
चुबता हुआ सन्नाटा , टकराती हुई आवाज़ें,
ज़िन्दगी की छोटी – बड़ी , हर पलों की बातें हुई हैं|

 

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Translation (By Ridhi Gupta)

I haven’t read too many books,

But I have met a lot of folks.

Days of happiness,

and nights full of sadness, have passed,

Chaotic voices, and pinching silence,

Life’s, small and big, a lot of stories we’ve discussed.

भय – Bhay

ये जो भय है ना, भय,
कई सपनो को चूर कर देता है|
.
.
ये जो भय है ना, इसे ढाल बना लो,
तो इन्ही सपनो को मशहूर कर देता है|

 

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Translation (by Ridhi Gupta)

That fear, you know That Fear?
It’s turned so many dreams to dust.
That fear, you know That Fear,
If into a shield it is turned,
Those same dreams that were dust,
Like brilliant stars they would then burn.

इंतज़ार – Intezaar

इंतज़ार करते हो तुम, शाम ढलने का?
कि सुबह फिर नया पैगाम लाएगी|
.
.
सूरज के डूबने का इंतज़ार तो हम भी करते हैं,
ताकि ये रात हमारे ज़ख्मो को सुलाने फिर लौट आएगी|

 

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Translation (by Ridhi Gupta)

You wait patiently for the evenings to come,

Because every morning is a new start for you.

I too sit here patiently awaiting,

Every day for the sun to set,

The night to come and put,

All of my aching wounds to rest.

 

आफ़ियत – Aafiyat (comfort)

आफ़ियत की बस गुज़ारिश थी,

जज़्बातों की नुमाइश नहीं

आसुओं की बड़ी नवाज़िश थी,

कहीं अँधेरी रातों की साज़िश तो नहीं?

Translation (by Ridhi Gupta)

There was a small wish for comfort,

My feelings that had been now put on display,

My tears, they flowed so generously,

Are these relentless dark nights conspiring against me?

Rooh – रूह

कुछ लोगों में बात ही कुछ ऐसी है, 

रूह को छु जायेंगे|


जिस्म का क्या है? मिटटी से बने हैं ,

मिटटी में मिल जायेंगे|

Translation by Ridhi Gupta

Some people just have a way,

Your very soul they touch.


The body is nothing but a myth,

Ashes to ashes dust to dust.

आवाज़ें – Aawaazein

चेहरों पर मुस्कुराहट लिए चले जा रहे हैं
नजाने कहीं शोर मच रहा था
कहीं गुस्से का तो कहीं सिसकियों का
तो कहीं धोके का खेल रच रहा था

खैर मुस्कान तो सिर्फ एक नकाब है
क्यूंकि ये तो वह आवाज़ें हैं जिनका साया मन के हर कोनो में जच रहा था|

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Translation (by Ridhi Gupta)

With smiles plastered on our faces,
We keep walking through life’s phases,
Surrounded by sounds that portrayed,
The anger, the sadness,
And those of hearts being betrayed.
But we’ve always known those smiles as facades.
Because the voices we heard were those,
whose every intonation is like a hidden shadow,
in the corners of our mind they hide, they grow.

Bayaan

सोचा खामोशी का खेल खेलते हैं,
क्योंकि हड़बड़ी जो जुबां कर देती है
.
.
लेकिन इन शातिर नज़रों का क्या करें?
कमबख्त सब बयां कर देती है|

 ||Translation||
I thought I’d play your heart with my silence,
My words, I stutter and stumble with anyway,
But how to avert these convoluted eyes
They defy me and go forth to declare,
What I was trying so hard, not to say.
.
.
.
.
Translation by – Ridhi Gupta.IMG_20170401_194655_025

जोगन – Jogan

मैं उड़ती हूँ ज़मीन पर
चलती हूँ आसमानो में
सुनती हूँ सन्नाटों को
बोलती हूँ हवाओं से
नाचती हूँ अंगारों पर ,
तैरती हूँ आग में
जिगर है चट्टानों सा
और उभरती हूँ ज्वाला सी
जोगन नहीं किसी और की
वह तो फितरत है कमज़ोर की
न रूप की न व्यक्तित्व की
जोगन हूँ मैं अपने अस्तित्व की |

अनजान बनकर देखोगे तो कमली नज़र आउंगी
अस्तित्व को जान कर परखोगे तो जोगन केहलाउंगी|

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Image of Nimisha Verma

Main udti hoon zameen par
Chalti hoon aasmaano main
Sunti hoon sannaton ko
Bolti hoon hawaon se
Naachti hoon angaaron par,
Tairti hoon aag mein
Jigar hai chattano sa
Aur ubharti hoon jwala si
Jogan nahi kisi aur ki
Woh toh fitrat hai kamzor ki
na roop ki na vyaktitva ki
Jogan hoon main apne astitva ki|
Anjaan banker dekhoge toh kamli nazar aaungi
Astitva ko jaan kar parkhoge toh jogan kehlaungi |