Rooh – रूह

कुछ लोगों में बात ही कुछ ऐसी है, 

रूह को छु जायेंगे|


जिस्म का क्या है? मिटटी से बने हैं ,

मिटटी में मिल जायेंगे|

Translation by Ridhi Gupta

Some people just have a way,

Your very soul they touch.


The body is nothing but a myth,

Ashes to ashes dust to dust.

जोगन – Jogan

मैं उड़ती हूँ ज़मीन पर
चलती हूँ आसमानो में
सुनती हूँ सन्नाटों को
बोलती हूँ हवाओं से
नाचती हूँ अंगारों पर ,
तैरती हूँ आग में
जिगर है चट्टानों सा
और उभरती हूँ ज्वाला सी
जोगन नहीं किसी और की
वह तो फितरत है कमज़ोर की
न रूप की न व्यक्तित्व की
जोगन हूँ मैं अपने अस्तित्व की |

अनजान बनकर देखोगे तो कमली नज़र आउंगी
अस्तित्व को जान कर परखोगे तो जोगन केहलाउंगी|

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Image of Nimisha Verma

Main udti hoon zameen par
Chalti hoon aasmaano main
Sunti hoon sannaton ko
Bolti hoon hawaon se
Naachti hoon angaaron par,
Tairti hoon aag mein
Jigar hai chattano sa
Aur ubharti hoon jwala si
Jogan nahi kisi aur ki
Woh toh fitrat hai kamzor ki
na roop ki na vyaktitva ki
Jogan hoon main apne astitva ki|
Anjaan banker dekhoge toh kamli nazar aaungi
Astitva ko jaan kar parkhoge toh jogan kehlaungi |