इंतज़ार – Intezaar

इंतज़ार करते हो तुम, शाम ढलने का?
कि सुबह फिर नया पैगाम लाएगी|
.
.
सूरज के डूबने का इंतज़ार तो हम भी करते हैं,
ताकि ये रात हमारे ज़ख्मो को सुलाने लौट आएगी|

 

PicsArt_08-06-06.46.02

 

Translation (by Ridhi Gupta)

You wait patiently for the evenings to come,

Because every morning is a new start for you.

I too sit here patiently awaiting,

Every day for the sun to set,

The night to come and put,

All of my aching wounds to rest.

 

नुमाइश – Numaish

ज़्यादा नहीं बस माँगा साथ तुम्हारा था,
पूरा समुन्दर नहीं बस चाहा एक किनारा था|
पूरी कहानी नहीं बस कहानी का एक पन्ना चाहा था,
तुम्हारा वजूद नहीं बस उसका एक हिस्सा माँगा था|
पर तुम्हारे मंज़िल की राह मेरे खिलाफ थी,
इस रिश्ते की कोई तख्दीर नहीं यह बात अब साफ़ थी|
इस रिश्ते के हर माँझे को थामने की यह साज़िश,
बन गयी मेरे आंसुओं की नुमाइश|
तुम्हे लगता था कि तुमने मेरी वफ़ा पर वार कर दिया,
अरे तुम्हे क्या पता, तुमने तो मेरा जीना ही दुश्वार कर दिया|

Zyaada nahi bas maanga saath tumhara tha,
poora samundar nahi bas chaha ek kinara tha.
Poori kahaani nahi bas kahaani ka ek panna chaha tha,
tumhara wajood nahi bas uska ek hissa maanga tha.
Par tumhare manzil ki raah mere khilaaf thi,
iss rishte ki koi takhdeer nahi yeh baat ab saaf thi.
Is rishte ke har manjhe ko thaamne ki yeh saazish,
ban gayi mere aansuon ki numaish.
Tumhe lagta tha ki tumne meri wafa par waar kar diya,
arre tumhe kya pata, tumne toh mera jeena hi dushwaar kar diya.

लोग बस नहीं रुके!

सुनता जा रहा था मैं , लोग केहते न रुके
जलता जा रहा था मैं , लोग आग लगते न रुके|
सिसकियाँ लेता जा रहा था मैं , लोग रुलाते न रुके
सिर चकरा जा रहा था मेरा , लोग घूमते न रुके|
बहता जा रहा था मैं , लोग कहानिया बनाते न रुके
दबता जा रहा था मैं , लोग मुझ पर चलते रा रुके|
सुनता जा रहा था मैं , लोग केहते न रुके
और बोलना चाह रहा था मैं , पर लोग बस नहीं रुके|

Sunta ja raha tha main, log kehete na ruke
Jalta ja raha tha main, log aag lagate na ruke.
Siskiyan leta ja raha tha main, log rulate na ruke
Sar chakra ja raha tha mera, log ghumate na ruke.
Behta ja raha tha main, log kahaniya banate na ruke,
Dabta ja raha tha main, log mujh par chalte ra ruke.
Sunta ja raha tha main, log kehete na ruke
Aur bolna chah raha tha main, par log bas nahi ruke.